
बीकानेर 10 जुलाई।शहर में बारिश के सुहावने मौसम को यादगार बनाने के उद्देश्य से जे.एन.वी. कॉलोनी स्थित शौर्य किड्स स्कूल में बच्चों के लिए विशेष ‘बोट सेलिंग एक्टिविटी’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आधुनिक समय में मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की बढ़ती निर्भरता के बीच बच्चों को पारंपरिक एवं विलुप्त होते खेलों से जोड़ना तथा उनके मानसिक, शारीरिक और सामाजिक विकास को बढ़ावा देना था।बारिश के मौसम की इस अनूठी गतिविधि में नन्हे-मुन्ने बच्चे नीले रंग की आकर्षक वेशभूषा में विद्यालय पहुंचे। बच्चों ने रंग-बिरंगे कागज़ से बनी नावों को पानी में तैराया और पूरे उत्साह, उमंग तथा हर्षोल्लास के साथ इस गतिविधि का आनंद लिया। बच्चों के चेहरों पर खिली मुस्कान और उनकी मासूम खुशियाँ पूरे वातावरण को जीवंत बना रही थीं। विद्यालय परिसर में ऐसा माहौल बन गया मानो बचपन की पुरानी यादें फिर से ताज़ा हो गई हों।विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती नीलम शेखावत ने बताया कि आज की पीढ़ी धीरे-धीरे पारंपरिक खेलों से दूर होती जा रही है। विद्यालय का प्रयास है कि बच्चों को दादी-नानी के समय में खेले जाने वाले खेलों से परिचित कराया जाए, ताकि वे मोबाइल की दुनिया से निकलकर रचनात्मक, मनोरंजक और स्वास्थ्यवर्धक गतिविधियों में भाग लें। उन्होंने कहा कि पुराने समय में बारिश होते ही दादी-नानी बच्चों के लिए कागज़ की छोटी-छोटी नावें बनाकर देती थीं और बच्चे उन्हें पानी में तैराकर आनंद लेते थे। इसी परंपरा को जीवंत रखने के उद्देश्य से इस गतिविधि का आयोजन किया गया।उन्होंने बताया कि विद्यालय समय-समय पर पोशमपा, रस्साकशी, गिल्ली-डंडा, कंचे, खो-खो, गुट्टे, घोड़ा-चमारखाई, सितोलिया सहित अनेक पारंपरिक खेलों का आयोजन करता है। ये खेल बच्चों के मानसिक एवं शारीरिक संतुलन के साथ-साथ टीम भावना, रचनात्मकता, आत्मविश्वास और सामाजिक सहभागिता को भी विकसित करते हैं।कार्यक्रम के सफल आयोजन में विद्यालय की अध्यापिकाओं रिचा कटारिया एवं कोमल सोनी का विशेष योगदान रहा। उन्होंने बच्चों के लिए पूरी गतिविधि को रोचक, सुरक्षित और आनंदमय बनाया। विद्यालय परिवार का मानना है कि ऐसे आयोजन बच्चों को भारतीय संस्कृति और पारंपरिक खेलों से जोड़ने के साथ-साथ उनके सर्वांगीण विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

